Naina Devi Mandir- Shakti Peeth

The Temple of Shri Naina Devi Ji is situated on a hilltop in the Bilaspur Distt. of Himachal Pradesh in India.It was built by a Gurjar Shepherd. The temple is connected with National Highway No. 21. The temple at the top of the hill can be reached via road (that curves round the hill up to a certain point) and then by concrete steps (that finally reach the top). There is also a cable car facility that moves pilgrims from the base of the hill all the way to the top.

Introduction Shri Naina Devi Ji:

Naina deviThe hills of Naina Devi overlook the Gobind Sagar lake. The lake was created by the Bhakra-Nangal Dam.Shri Naina Devi Ji Temple is connected to NH-21 & is 70 kilometers from Bilaspur, 108 Km from Chandigarh, and 18 Km from Bhakra and 20 km from Anandpur Sahib.

It is situated on triangle Hill also known as Naina Dhar hill which is 3535 feet from Sea Level.

Shri Naina Devi Ji Temple has emerged as one of the most reverted center of pilgrims in region for both Hindu and Sikhs.

Surrounded by famous land mark of Bhakra Dam, Anandpur Sahib, and Govind Sagar Lake.

It is one of the famous 51 Shakti Peeths of Hindus having mythological linkage with Lord Shiva & Guru Govind Singh.

हिन्दुओं का पवित्र तीर्थ स्थल नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के शिवालिक पर्वत की श्रेणियों पर स्थित है. मान्यता है कि यहां पर माता सती के दोनों नेत्र गिरे थे. माता नैना देवी अपने इस भव्य मंदिर में पिंडी रूप में स्थापित हैं. नैना देवी मंदिर के मुख्य द्वार के दाई ओर भगवान गणेश और हनुमानजी की मूर्ति है और मुख्यद्वार के पार करने के पश्चात् शेर की दो प्रतिमाएं है, जिसे माता का वाहन माना जाता है. नैना देवी मंदिर के गर्भगृह में 3 मुख्य मूर्तियां हैं, जिसमें माता नैना देवी मध्य में हैं, उनके दाई ओर माता काली हैं, जबकि उनके बाई ओर गणेश जी हैं. मंदिर के समीप एक गुफा है, जिसे नैना देवी गुफा कहा जाता है.

नवरात्री नैना देवी मदिर का प्रमुख त्यौहार है. हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र और आश्विन में होने वाले दोनों नवरात्री के अवसर पर माता के इस मंदिर में विशाल मेले का आयोजन किया जाता है. भोग के रूप में माता को 56 प्रकार की वस्तुओं का भोग लगाया जाता है. आस्थावान भक्तों में मान्यता है कि इस समय यदि कोई श्रद्धा से माता की पूजा-अर्चना करता है तो, उसकी सारी मुसीबतें समाप्त हो जाती हैं और वह धन, धान्य और संतान आदि का सुख प्राप्त करता है.